bhajan lyrics

मोहन से दिल क्यूँ लगाया है, यह मैं जानू या वो जाने । छलिया से दिल क्यूँ लगाया है, यह मैं जानू या वो जाने ॥ हर बात निराली है उसकी, कर बात में है इक टेडापन । टेड़े पर दिल क्यूँ आया है, यह मैं जानू या वो जाने ॥ जितना दिल ने तुझे याद किया, उतना जग ने बदनाम किया । बदनामी का फल क्या पाया हैं, यह मैं जानू या वो जाने ॥ तेरे दिल ने दिल दीवाना किया, मुझे इस जग से बेगाना किया । मैंने क्या खोया क्या पाया हैं, यह मैं जानू या वो जाने ॥ मिलता भी है वो मिलता भी नहीं, नजरो से मेरी हटता भी नहीं । यह कैसा जादू चलाया है, यह मैं जानू या वो जाने ॥

आ लौट के आजा हनुमान तुम्हे श्री राम बुलाते हैं

आ लौट के आजा हनुमान, तुम्हे श्री राम बुलाते हैं।

जानकी के बसे तुममे प्राण, तुम्हे श्री राम बुलाते हैं॥

लंका जला के सब को हरा के तुम्ही खबर सिया की लाये।

पर्वत उठा के संजीवन ला के तुमने लखन जी बचाए।

हे बजरंगी बलवान, तुम्हे हम याद दिलाते हैं॥

पहले था रावण एक ही धरा पे, जिसको प्रभु ने संघारा।

तुमने सवारे थे काज सारे, प्रभु को दिया था सहारा।

जग में हे वीर सुजान भी तेरे गुण गाते हैं॥

है धरम संकट में धर्म फिर से, अब खेल कलयुग ने खेले।

हैं लाखों रावण अब तो यहाँ पे, कब तक लड़े प्रभु अकेले।

जरा देख लगा के ध्यान, तुम्हे श्री राम बुलाते हैं॥

है राम जी बिन तेरे अधूरे, अनजानी माँ के प्यारे।

भक्तो के सपने करने को पूरे, आजा पवन के दुलारे।

करने जग का कल्याण, तुम्हे श्री राम बुलाते हैं॥

तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से आयी हूँ

तेरी मुरली की धुन सुनने मैं बरसाने से आयी हूँ ।
मैं बरसाने से आयी हूँ, मैं वृषभानु की जाई हूँ ॥
अरे रसिया, ओ मन वासिय, मैं इतनी दूर से आयी हूँ ॥

सुना है श्याम मनमोहन, के माखन खूब चुराते हो ।
उन्हें माखन खिलने को मैं मटकी साथ लायी हूँ ॥

सुना है श्याम मनमोहन, के गौएँ खूब चरते हो ।
तेरे गौएँ चराने को मैं ग्वाले साथ लायी हूँ ॥

सुना है श्याम मनमोहन, के कृपा खूब करते हो ।
तेरी कृपा मैं पाने को तेरे दरबार आयी हूँ ॥
श्रेणीकृष्ण भजन

यह तो प्रेम की बात है उधो

यह तो प्रेम की बात है उधो,
बंदगी तेरे बस की नहीं है।
यहाँ सर देके होते सौदे,
आशकी इतनी सस्ती नहीं है॥

प्रेम वालों ने कब वक्त पूछा,
उनकी पूजा में सुन ले ए उधो।
यहाँ दम दम में होती है पूजा,
सर झुकाने की फुर्सत नहीं है॥

जो असल में हैं मस्ती में डूबे,
उन्हें क्या परवाह ज़िन्दगी की।
जो उतरती है चढ़ती है मस्ती,
वो हकीकत में मस्ती नहीं है॥

जिसकी नजरो में है श्याम प्यारे,
वो तो रहते हैं जग से न्यारे।
जिसकी नज़रों में मोहन समाये,
वो नज़र फिर तरसती नहीं है॥

दीवाना तेरा आया बाबा तेरी शिर्डी में

है अजब तरह का सामान तेरी शिर्डी में,
आता हिन्दू है मुस्लमान तेरी शिर्डी में।
आए जितने भी परेशान तेरी शिर्डी में,
काम सबके हुए आसान तेरी शिर्डी में॥

दीवाना तेरा आया बाबा तेरी शिर्डी में।
नज़राना दिल का लाया बाबा तेरी शिर्डी में।

मिल मुझको मेरे बाबा, भरनी तुम्हे पड़ेगी,
झोली मैं खाली लाया बाबा तेरी शिर्डी में॥

मैं दीवाना हो गया रे, मैं दीवाना हो गया,
मैं दीवाना हो गया रे, मैं दीवाना हो गया॥

यूँ तो हज़ारो मंजर देखने हैं हसीं मेने,
दिल तो सकूँ पाया, बाबा तेरी शिर्डी में॥

शिर्डी को छोड़ कर मैं कहीं और कैसे जाऊं,
सब कुछ तो यहीं पाया, बाबा तेरी शिर्डी में॥

वो हो राम कृष्ण विष्णु या हो शेरों वाली मैया,
मुझे तू ही नज़र आया सब में, बाबा तेरी शिर्डी में॥

ना ‘हयात’ भूल पाया तेरी शिर्डी का वो मंज़र,
भगवान नज़र आया बाबा तेरी शिर्डी में॥

गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना

मैं शरण पड़ा तेरी चरणों में जगह देना,
गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना।

करूणानिधि नाम तेरा, करुन दिखलाओ तुम,
सोये हुए भाग्यो को, हे नाथ जगाओ तुम।
मेरी नाव भवर डोले इसे पार लगा देना,
गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना॥

जय गुरुदेवा, जय गुरुदेवा।
जय गुरुदेवा, जय गुरुदेवा॥

तुम सुख के सागर हो, निर्धन के सहारे हो,
इस तन में समाये हो, मुझे प्राणों से प्यारे हो।
नित्त माला जपूँ तेरी, नहीं दिल से भुला देना,
गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना॥

पापी हूँ या कपटी हूँ, जैसा भी हूँ तेरा हूँ,
घर बार छोड़ कर मैं जीवन से खेला हूँ।
दुःख का मार हूँ मैं, मेरा दुखड़ा मिटा देना,
गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना॥

मैं सब का सेवक हूँ, तेरे चरणों का चेरा हूँ,
नहीं नाथ भुलाना मुझे, इसे जग में अकेला हूँ।
तेरे दर का भिखारी हूँ, मेरे दोष मिटा देना,
गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना॥

इन चरनन की पाऊं सेवा,
जय गुरुदेवा, जय गुरुदेवा।

निर्धन के घर भी आ जाना

कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे, निर्धन के घर भी आ जाना |
जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना ||

ना छत्र  बना सका सोने का, ना चुनरी घर मेरे टारों जड़ी |
ना पेडे बर्फी मेवा है माँ, बस श्रद्धा है नैन बिछाए खड़े ||
इस श्रद्धा की रख लो लाज हे माँ, इस विनती को ना ठुकरा जाना |
जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना ||

जिस घर के दिए मे तेल नहीं, वहां जोत जगाओं कैसे |
मेरा खुद ही बिशोना डरती माँ, तेरी चोंकी लगाऊं मै कैसे ||
जहाँ मै बैठा वही बैठ के माँ, बच्चों का दिल बहला जाना |
जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना ||

तू भाग्य बनाने वाली है, माँ मै तकदीर का मारा हूँ |
हे दाती संभाल भिकारी को, आखिर तेरी आँख का तारा हूँ ||
मै दोषी तू निर्दोष है माँ, मेरे दोषों को तूं भुला जाना |
जो रूखा सूखा दिया हमें, कभी उस का भोग लगा जाना ||

तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो

तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो।
तुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही हो॥

तुम्ही हो साथी तुम्ही सहारे,
कोई ना अपने सिवा तुम्हारे।
तुम्ही हो नईया, तुम्ही खिवईया,
तुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही हो॥

जो खिल सके ना वो फूल हम हैं,
तुम्हारे चरणों की धूल हम हैं।
दया की दृष्टि सदा ही रखना,
तुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही हो॥

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं, बाद अमृत पिलाने से क्या फ़ायदा ।
कभी गिरते हुए को उठाया नहीं, बाद आंसू बहाने से क्या फ़ायदा ॥

मैं तो मंदिर गया, पूजा आरती की, पूजा करते हुए यह ख़याल आ गया ।
कभी माँ बाप की सेवा की ही नहीं, सिर्फ पूजा के करने से क्या फ़ायदा ॥

मैं तो सतसंग गया, गुरु वाणी सुनी, गुरु वाणी को सुन कर ख्याल आ गया ।
जनम मानव का ले के दया ना करी, फिर मानव कहलाने से क्या फ़ायदा ॥

मैंने दान किया मैंने जप तप किया दान करते हुए यह ख्याल आ गया ।
कभी भूखे को भोजन खिलाया नहीं दान लाखों का करने से क्या फ़ायदा ॥

गंगा नहाने हरिद्वार काशी गया, गंगा नहाते ही मन में  ख्याल आ गया ।
तन को धोया मनर मन को धोया नहीं फिर गंगा नहाने से क्या फ़ायदा ॥

मैंने वेद पढ़े मैंने शास्त्र पढ़े, शास्त्र पढते हुए यह ख़याल आ गया ।
मैंने ज्ञान किसी को बांटा नहीं, फिर ग्यानी कहलाने से क्या फ़ायदा ॥

माँ पिता के ही चरणों में ही चारो धाम है, आजा आजा यही मुक्ति का धाम है ।
पिता माता की सेवा की ही नहीं फिर तीर्थों में जाने का क्या फ़ायदा ॥
श्रेणी विविध भजन

मोहन से दिल क्यूँ लगाया है यह मैं जानू या वो जाने

मोहन से दिल क्यूँ लगाया है, यह मैं जानू या वो जाने ।
छलिया से दिल क्यूँ लगाया है, यह मैं जानू या वो जाने ॥

हर बात निराली है उसकी, कर बात में है इक टेडापन  ।
टेड़े पर दिल क्यूँ आया है, यह मैं जानू या वो जाने ॥

जितना दिल ने तुझे याद किया, उतना जग ने बदनाम किया ।
बदनामी का फल क्या पाया हैं, यह मैं जानू या वो जाने ॥

तेरे दिल ने दिल दीवाना किया, मुझे इस जग से बेगाना किया ।
मैंने क्या खोया क्या पाया हैं, यह मैं जानू या वो जाने ॥

मिलता भी है वो मिलता भी नहीं, नजरो से मेरी हटता भी नहीं ।
यह कैसा जादू चलाया है, यह मैं जानू या वो जाने ॥

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